दुनियाभर की चिंता बढ़ा रहा कोरोना वायरस का संक्रमण कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. हर रोज संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. हिंदुस्तान सहित कई राष्ट्रों में लॉकडाउन हो चुका है व सभी लोगों को घर में रहने की अपील की जा रही है. कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का अनुपात बहुत अधिक है. एक शोध के अनुसार कोरोना वायरस का एक संक्रमित आदमी 408 लोगों को संक्रमित कर सकता है. वैसे इससे मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा कम होती है, लेकिन इससे यदि कोई बीमार आदमी संक्रमित हो जाए तो यह उस आदमी के लिए खतरनाक होने कि सम्भावना है, क्योंकि बीमार आदमी की रोग प्रतिरोधक क्षमता निर्बल होती है. कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे पहले फेफड़ों पर अटैक करता है. फेफड़ों में पहुंचकर कफ जमा होता जाता है, जिस वजह से संक्रमित आदमी को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. यह संक्रमण उन लोगों को ज्यादा प्रभावित नहीं करता, जिनके फेफड़े मजबूत हों. कोरोना वायरस के संक्रमण से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता लड़ती है, इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत महत्वपूर्ण है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व फेफडों को मजबूत करने के लिए हम रोज ये सरल और प्राणायाम कर सकते हैं - गोमुखासन गोमुखासन में गौ माता के समान मुद्रा होती है, इस आसन को करना बहुत ही आसान है. गोमुखासन वजन कम करने के लिए व शारीरिक सुंदरता बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है. इससे कंधे, जांघ की मांसपेशियां मजबूत होती है. इस आसन से फेफड़े मजबूत होते हैं व श्वसन संबंधित सभी बीमारियां अच्छा होती हैं. ताड़ासन इस आसन को प्रातः काल खाली पेट करना चाहिए. ताड़ासन करने से भी फेफड़े मजबूत होते हैं इसके अतिरिक्त पेट में भारीपन नहीं लगता है व कब्ज की शिकायत भी दूर होती है. यह आसन शरीर को लचीला भी बनाता है व मांसपेशियों का दर्द कम करता है. मत्स्यासन मत्स्यासन को करना भी बहुत ज्यादा आसान है, इसमें शरीर की मुद्रा मछली के समान दिखती है. मत्स्यासन करने से भी सांस की बीमारी अच्छा होती है. फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए मत्स्यासन सबसे बेहतर आसन है. इस आसन को भी प्रातः काल खाली पेट करने से ज्यादा लाभ होता है. शंशाकासन नियमित रूप से इस आसन को करने से शरीर मजबूत व लचीला बनता है. पाचन प्रणाली सक्रिय होती है व कब्ज को दूर करता है. इस आसन को करने से श्वसन क्रिया सक्रिय हो जाती है, जिससे फेफड़े मजबूत होते हैं. इसके अतिरिक्त यह आसन क्रोध, भय, शोक, आदि आवेश तथा भावनात्मक असंतुलन को कम करता है. दिल रोग, दमा, मधुमेह से पीड़ित आदमी के लिए यह उपयोगी योग है. पेट पर जमी अलावा चर्बी को कम कर फैट की चर्बी दूर करने में सहायक है. सूर्य नमस्कार www.myupchar.com से जुड़े डाक्टर लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, सूर्य नमस्कार में कुल 12 योगासन होते हैं. प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर 15 मिनट के लिए सूर्य नमस्कार करने से भी स्वास्थ्य अच्छा होता है. चूंकि, यह 12 योगासनों का संयोजन है, इसलिए यह शरीर के हर अंग का लाभ पहुंचाता है. सूर्य नमस्कार में श्वसन प्रक्रिया अधिक होती है, इसलिए फेफड़ों के लिए यह बहुत ज्यादा अच्छा माना जा सकता है. इसके अतिरिक्त सूर्य नमस्कार वजन कम करने के अतिरिक्त पाचन तंत्र को भी अच्छा करता है.
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कोरोना वायरस से बचाव के लिए फेफड़ों को स्वस्थ रखना कितना जरुरी